मोहम्मद बज़ीक का घर हैं मरते हुए बच्चों का आश्रय, 10 से ज़्यादा बच्चे यहाँ कह चुके हैं ज़िंदगी को अलविदा

मोहम्मद बज़ीक का घर हैं मरते हुए बच्चों का आश्रय, 10 से ज़्यादा बच्चे यहाँ कह चुके हैं ज़िंदगी को अलविदा

आज के अंधेरे समय में भी दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो मानवता में हमारी आशा और विश्वास को प्रेरित करते हैं। ये लोग अंधेरी रात में चमकते सितारों की तरह हैं - और इन्हीं चमकते सितारों में से एक मोहम्मद बज़ीक है।

कुछ लोगों के दिल इतने बड़े हैं की यकीन नहीं होता। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं मोहम्मद बज़ीक। उन्होंने अपने ज़िम्मे एक बहुत ही विशेष कार्य ले लिया है: वह है माता-पिता द्वारा छोड़े गए गंभीर रूप से बीमार बच्चों की देखभाल करना। आम तौर पर ये बच्चे एक अकेले अस्पताल में अपने जीवन को समाप्त करेंगे और छोड़ दिए जाएंगे। लेकिन मोहम्मद का शुक्रिया जिनकी वजह से अपने आखिरी महीनों और दिनों में उन्हें प्यार, शक्ति, गर्मदिली, और आनंद मिलता है।

इन बच्चों के लिए मोहम्मद की सहानुभूति के लिए काफ़ी हद तक उन्हें 62 वर्ष की उम्र में कैंसर से पीड़ित होना था। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था और उनके बेटा विकलांग था, इसलिए उन्हें अकेले ही अस्पताल जाना पड़ा और किसी के बिना ही शल्य चिकित्सा का सामना करना पड़ा। मोहम्मद पूरी तरह से अकेले महसूस करते थे- ऐसे सभी अकेले बच्चों की तरह जो हर दिन अस्पताल जाते हैं।

मोहम्मद के पास वास्तव में सोने का दिल है, जो मरते बच्चों को सुरक्षा, खुशी और आनंद की भावना देता है जो और कोई नहीं करेगा। यदि और अधिक लोग मोहम्मद की तरह बनते हैं, तो विश्व एक उज्ज्वल स्थान होगा।

कृपया विश्व को बेहतर जगह बनाने के लिए मोहम्मद की प्रेरक कहानी को फैलाने में मदद करें। क्योंकि कोई भी सब कुछ नहीं कर सकता है, लेकिन हर कोई कुछ कर सकता है।





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