महिला वर्ल्ड कप: रोमांचक मुकाबले में आखिरी ओवरों में भारत ने गँवाई जीत

महिला वर्ल्ड कप: रोमांचक मुकाबले में आखिरी ओवरों में भारत ने गँवाई जीत

महिला वर्ल्ड कप 2017 का फाइनल मैच रविवार को इंग्लैंड और भारत के बीच लॉर्ड्स में खेला गया। इस मुकाबले में भारतीय टीम आखिरी ओवरों में दबाव को नहीं झेल पाई और 9 रनों से हारकर उपविजेता बन संतोष करना पड़ा। हालांकि, भारतीय टीम इतिहास बनाने से जरूर चूक गई, लेकिन टूर्नमेंट में जिस जज्बे के साथ भारतीय टीम ने खेला उसकी हर ओर तारीफ हो रही है।

मैच में एक वक्त भारतीय टीम काफी मजबूत नजर आ रही थी। एक वक्त टीम का स्कोर 42.4 ओवर में 3 विकेट पर 191 रन था और वो जीत से केवल 38 रन दूर थी। अगले 28 रन के अंदर बाकी की सातों खिलाड़ी पविलियन लौट गईं। दबाव में अनुभवहीन भारतीय टीम बुरी तरह से लड़खड़ा गई और लगातार विकेट गिरते रहे।

47 ओवर के बाद भारत का स्कोर 7 विकेट पर 215 रन था। इस वक्त टीम को जीत के लिए 18 बॉल पर 14 रन की जरूरत थी और उसके 3 विकेट बाकी थे। क्रीज पर दीप्ति शर्मा और शिखा पांडेय मौजूद थीं और ऐसा लग रहा था कि सिंगल बटोरकर भी आराम से जीत तक पहुंचा जा सकता है। जेनी गुन के ओवर की पहली बॉल पर शिखा ने 1 रन लिया। अगली गेंद पर दीप्ति ने 1 रन लिया और उसकी अगली गेंद पर वाइड के रूप में 1 अतिरिक्त रन मिला। अब 16 गेंद पर 11 रन बनाने थे।

अब तक जीत पूरी तरह से भारत की तय लग रही थी, लेकिन गुन की अगली गेंद पर सिंगल चुराने के चक्कर में शिखा पांडेय आउट हो गईं। भारतीय खेमे मे निराशा और करोड़ों क्रिकेट फैंस की दुआएं और तेजी से शुरू हो गई। शिखा के बाद बैटिंग करने आईं पूनम और वह पहली गेंद पर कोई रन नहीं ले सकीं। अब 14 गेंद पर 11 रनों की जरूरत थी। अगली दोनों ही गेंदों पर कोई रन नहीं बना और भारत को जीतने के लिए 12 गेंद पर 11 रन बनाने थे।

49वें ओवर की पहली ही गेंद पर दीप्ति शर्मा आउट हो गईं और इसके साथ ही भारत की जीत की रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई। अब 11 गेंद में 11 रन बनाने थे, लेकिन क्रीज पर दोनों ही लड़कियां मूल रूप से बोलर थीं। अगली गेंद पर पूनम यादव रन नहीं बना सकीं, उसकी अगली गेंद पर उन्होंने 1 रन लिया। अब जीत के लिए चाहिए थे 10 रन।

अंतिम विकेट के लिए राजेश्वरी गायवाड़ और पूनम यादव क्रीज पर थीं। भारतीय खेमे में जैसे-तैसे जीत की उम्मीद जरूर थी, लेकिन श्रुबरोल की गेंद पर गायकवाड़ आउट हो गईं और भारतीय खिलाड़ियों के साथ करोंड़ों फैंस की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया। इसके साथ ही 1983 में जिस मैदान पर कपिलदेव और टीम ने वर्ल्ड कप उठाया था, वहां भारतीय महिला टीम को उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा।





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